OMG इंदिरा गाँधी परिवार को लगा था संतों का श्राप ! इसलिए पूरा परिवार एक ही दिन मारा गया था !

आज विज्ञान के दौर में हम आपसे हवा में यह बोलेंगे कि श्राप और बददुआ जैसी चीजें होती हैं तो शायद आप यकीन ना करें.

लेकिन आज हम आपको बता रहे हैं कि कैसे एक श्राप ने इंदिरा गांधी के पूरे परिवार को ख़त्म किया है-indira-gandhi

गोहत्या को ब्रह्मा की हत्या बताया गया है –

आप शास्त्रों को पढ़ लीजिये या फिर किसी विद्वान व्यक्ति से पूछ लीजिये कि गोहत्या के बारें में शास्त्र क्या कहते हैं?

गोहत्या को ब्रह्मा की हत्या बताया गया है. शुरुआत से ही गो हिन्दूओं के लिए पूजनीय रही है और भगवान रही है. गाय में सभी हिन्दू देवताओं का रूप है. अब बेशक पढ़े लिखे लोग इसको मजाक समझे लेकिन सनातन धर्म तो यही कहता है.

गोपाष्टमी के दिन सन 1966 को मिला था इंदिरा गांधी को संतों का श्राप –

कार्तिक शुक्ल पक्ष अष्टमी को गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाता है. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गौ चारण की लीला शुरू की थी. साल 1966 में जब इंदिरा गाँधी प्रधानमंत्री थीं तो उस समय लाखों संत संसद के सामने इकठ्ठा हुए थे ताकि गोरक्षा के कोई कानून सरकार बना सकें. लेकिन इंदिरा गांधी ने तब संतों पर जिस तरह से गोलियां चलवाई थीं, संतों ने उसी समय इंदिरा गांधी को श्राप दिया था.

अब आप इस बात को मजाक में ले रहे होंगे और हंस रहे होंगे. इस गोली काण्ड में 66 साधू संत मारे गये थे.

तो अब इंदिरा गांधी की हत्या के दिन संतों का श्राप –

तो अब आप जरा कलेंडर उठाकर देख लीजिये कि जिस दिन इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी तो उस दिन गोपाष्टमी का ही दिन था.

(पुस्तक हिन्दू चर्मकार जाति के अन्दर लेखक विजय सोनकर शास्त्री ने यह बात पेज 177 पर लिखी है.)

और तो और ऐसा भी बताया गया है कि इंदिरा गांधी की हत्या में कुछ 66 गोलियां ही चली थीं. तो अब तो आपको लगने लगा होगा कि हाँ इंदिरा गांधी की हत्या और संतों के श्राप में जरुर कोई कनेक्शन रहा होगा.

राजीव गाँधी और संजय गाँधी की मृत्यु भी संतों का श्राप – 

अब इसको आकस्मिक कुछ नहीं बोला जा सकता है जो हो रहा था वह सबकुछ शायद इंदिरा गाँधी ने अपनी तक़दीर में लिखा था. राजीव गांधी की जिस तरह से दर्दनाक मौत हुई है उसको दुःख तो सभी को रहेगा लेकिन इनकी हत्या वाले दिन भी गोपाष्टमी का ही दिन था. देश में गाय की पूजा की जा रही थी.

चलिए हो सकता है कि इंदिरा गांधी के लिए और राजीव गांधी के लिए यह दिन आकस्मिक रूप से आ गया था. किन्तु संजय गांधी की मौत तो दुर्घटना थी और इनकी मौत के दिन गोपाष्टमी दिन कैसे आ गया था?

अब इसको समझने वाले कुछ भी समझें लेकिन यह एक रहस्य ही है कि क्या वाकई गांधी परिवार के इन तीन लोगों को संतों का श्राप लगा था? जिस तरह से गाय की रक्षा के लिए संत शान्तिपूर्वक आन्दोलन कर रहे थे क्या उन पर गोलियां चलवाना वाकई जरुरी था? हो ना हो लेकिन गो हत्या का श्राप इंदिरा गाँधी के लिए सच में भारी पड़ा है.

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