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Saksham Sharma

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  • मैंने भी शब्दांकन में कविताएँ पढ़ी , इतनी मार्मिक चीजे पढ़कर लगा सच नंगा है पर तो कहने का दांग बिलकुल नया और बिंदास —-इतनी मुखरता मानो सरस्वती ने शब्दों का भाव पूर्ण झरना बहा दिया हो असल है — नक़ल या प्रेरित कविता नहीं है — नोटिस में आनी चाहिए ये किसी समाज का सच है — शोषित नारी का सच—- जिसमे आग के साथ बेबाकी है , सुघड़ सा भोलापन है —- कमसे कम मधुर श्री कि कथित पुरस्कृत कविता से लाख गुना बेहतर –हर लड़की हर नारी को पढनी चाहिए — ये एक समाज का आइना हैं रेणु

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